भीष्म–दुर्योधनसंवादः — शिखण्डिनं न हन्तुं कारणकथनम्
Amba-ākhyāna prologue
योत्स्येते बलिनौ शूरौ परं शक््त्या क्षयिष्यत: । पाण्डवोंके लिये महान् पराक्रम करनेवाले बलवान् शूरवीर अज और भोज दोनों महारथी हैं। वे सम्पूर्ण शक्ति लगाकर युद्ध करेंगे और अपने पुरुषार्थका परिचय देंगे ।। १२ £ शीघ्रास्त्राश्षित्रयोद्धार: कृतिनो दृढविक्रमा:,राजेन्द्र! शीघ्रतापूर्वक अस्त्र चलानेवाले, विचित्र योद्धा, युद्धकालमें निपुण और दृढ़ पराक्रमी जो पाँच भाई केकयराजकुमार हैं, वे सभी उदार रथी माने गये हैं। उन सबकी ध्वजा लाल रंगकी है
yotsyete balinau śūrau paraṁ śaktyā kṣayiṣyataḥ |
ସେଇ ଦୁଇ ବଳବାନ ଶୂର ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଶକ୍ତି ଲଗାଇ ଯୁଦ୍ଧ କରିବେ ଏବଂ ରଣରେ ସଂହାର ସାଧିବାକୁ ଦୃଢ଼ ସଙ୍କଳ୍ପ କରିବେ। ପାଣ୍ଡବମାନଙ୍କ ହିତାର୍ଥେ ମହାପରାକ୍ରମଶାଳୀ ବଳିଷ୍ଠ ଶୂରବୀର ଅଜ ଓ ଭୋଜ—ଉଭୟେ ମହାରଥୀ। ସେମାନେ ସମସ୍ତ ଶକ୍ତି ଦେଇ ଯୁଦ୍ଧ କରି ନିଜ ପୁରୁଷାର୍ଥ ପ୍ରକାଶ କରିବେ।
भीष्म उवाच