Pāṇḍava-senā-niryāṇa and Vyūha-vibhāga (पाण्डवसेनानिर्याण तथा व्यूहविभाग)
यच्चापि भीमसेनस्य मन्यसे मोघभाषितम् । दुःशासनस्य रुधिरं पीतमद्यावधारय,“इसके सिवा, तू जो भीमसेनकी कही हुई बातोंको व्यर्थ मानने लगा है, यह ठीक नहीं है। तू आज ही निश्चितरूपसे समझ ले कि भीमसेनने दुःशासनका रक्त पी लिया
yaccāpi bhīmasenasya manyase moghabhāṣitam | duḥśāsanasya rudhiraṃ pītam adyāvadhāraya ||
ଏବଂ ତୁମେ ଭୀମସେନଙ୍କ କଥାକୁ ମିଥ୍ୟା ଗର୍ବୋକ୍ତି ଭାବୁଛ—ଏହା ଠିକ୍ ନୁହେଁ। ଆଜି ନିଶ୍ଚିତ ଭାବେ ଜାଣି ରଖ—ଭୀମ ଦୁଃଶାସନଙ୍କ ରକ୍ତ ପିଇଛି।
श्रीकृष्ण उवाच