Pāṇḍava-senā-niryāṇa and Vyūha-vibhāga (पाण्डवसेनानिर्याण तथा व्यूहविभाग)
प्रयाहि शीघ्र कैतव्य ब्रूयाश्वैव सुयोधनम् । श्रुतं वाक्य गृहीतो<र्थों मतं यत् ते तथास्तु तत्,“जुआरी शकुनिके पुत्र उलूक! तू शीघ्र लौट जा और दुर्योधनसे कह दे--'पाण्डवोंने तुम्हारा संदेश सुना और उसके अर्थको समझकर स्वीकार किया। युद्धके विषयमें जैसा तुम्हारा मत है, वैसा ही हो”
sañjaya uvāca | prayāhi śīghraṃ kaitavya brūyāś caiva suyodhanam | śrutaṃ vākyaṃ gṛhīto 'rtho mataṃ yat te tathāstu tat ||
ସଞ୍ଜୟ କହିଲେ—“ହେ ଜୁଆରି! ଶୀଘ୍ର ଫେରିଯାଅ ଏବଂ ସୁୟୋଧନଙ୍କୁ କୁହ—‘ପାଣ୍ଡବମାନେ ତୁମ ସନ୍ଦେଶ ଶୁଣିଛନ୍ତି, ତାହାର ଅର୍ଥ ବୁଝି ଗ୍ରହଣ କରିଛନ୍ତି। ଯୁଦ୍ଧ ବିଷୟରେ ତୁମ ମତ ଯେପରି, ସେପରି ହେଉ।’”
संजय उवाच