Pāṇḍava-senā-niryāṇa and Vyūha-vibhāga (पाण्डवसेनानिर्याण तथा व्यूहविभाग)
धृष्टद्युम्न: शिखण्डी च सात्यकिश्व महारथ: । केकया भ्रातर: पज्च राक्षसक्ष घटोत्कच:,दन्तान् दन्तेषु निष्पिष्य सृक्किणी परिलेलिहन् | धष्टद्युम्न, शिखण्डी, महारथी सात्यकि, पाँच भाई केकयराजकुमार, राक्षस घटोत्कच, द्रौपदीके पाँचों पुत्र, अभिमन्यु, राजा धृष्टकेतु, पराक्रमी भीमसेन तथा महारथी नकुल- सहदेव--ये सब-के-सब क्रोधसे लाल आँखें किये अपने आसनोंसे उछलकर खड़े हो गये और अंगद, पारिहार्य (मोतियोंके गुच्छों) तथा केयूरोंसे विभूषित एवं लाल चन्दनसे चर्चित अपनी सुन्दर भुजाओंको थामकर दाँतोंपर दाँत रगड़ते हुए ओठोंके दोनों कोने चाटने लगे
sañjaya uvāca | dhṛṣṭadyumnaḥ śikhaṇḍī ca sātyakiś ca mahārathaḥ | kekayā bhrātaraḥ pañca rākṣasaś ca ghaṭotkacaḥ | dantān danteṣu niṣpiṣya sṛkkiṇī parilelihan |
ଧୃଷ୍ଟଦ୍ୟୁମ୍ନ, ଶିଖଣ୍ଡୀ, ମହାରଥୀ ସାତ୍ୟକି, କେକୟଙ୍କ ପାଞ୍ଚ ଭାଇ ଓ ରାକ୍ଷସ ଘଟୋତ୍କଚ—ଦାନ୍ତ ଉପରେ ଦାନ୍ତ ଚାପି ଘସି, ଓଠର କୋଣ ଚାଟି—କ୍ରୋଧରେ ନିଜ ଆସନରୁ ଉଛଳି ଉଠି ଦଣ୍ଡାୟମାନ ହେଲେ।
संजय उवाच