अग्निस्तुति, इन्द्रदर्शन, नहुष-भयवर्णन
Agni-hymn, discovery of Indra, and the Nahuṣa threat
एवं स्तुतो हव्यवाट् स भगवान् कविरुत्तम: । बृहस्पतिमथोवाच प्रीतिमान् वाक्यमुत्तमम् | दर्शयिष्यामि ते शक्रं सत्यमेतद् ब्रवीमि ते,इस प्रकार स्तुति की जानेपर हविष्य वहन करनेवाले श्रेष्ठ एवं सर्वज्ञ भगवान् अग्निदेव प्रसन्न होकर बृहस्पतिसे यह उत्तम वचन बोले--'ब्रह्मन! मैं आपको इन्द्रका दर्शन कराऊँगा, यह मैं आपसे सत्य कह रहा हूँ”
evaṁ stuto havyavāṭ sa bhagavān kavir uttamaḥ | bṛhaspatim athovāca prītimān vākyam uttamam | darśayiṣyāmi te śakraṁ satyam etad bravīmi te ||
ଏଭଳି ସ୍ତୁତି ପାଇ ହବ୍ୟବାହନ, ଶ୍ରେଷ୍ଠ ଦର୍ଶୀ ଭଗବାନ୍ ଅଗ୍ନିଦେବ ପ୍ରସନ୍ନ ହୋଇ ବୃହସ୍ପତିଙ୍କୁ ଏହି ଉତ୍ତମ ବଚନ କହିଲେ— “ହେ ବ୍ରାହ୍ମଣ! ମୁଁ ତୁମକୁ ଶକ୍ର (ଇନ୍ଦ୍ର)ଙ୍କ ଦର୍ଶନ କରାଇବି; ଏହା ମୁଁ ତୁମକୁ ସତ୍ୟ କହୁଛି।”
शल्य उवाच