Adhyāya 128 — Proposal to Restrain Keśava; Sātyaki’s Warning and Vidura–Dhṛtarāṣṭra Counsel
अविधेयानि हीमानि व्यापादयितुमप्यलम् । अविधेया इवादान्ता हया: पथि कुसारथिम्,'जैसे उद्दण्ड घोड़े काबूमें न होनेपर मूर्ख सारथि-को मार्गमें ही मार डालते हैं, उसी प्रकार यदि इन इन्द्रियोंको काबूमें न रखा जाय तो ये मनुष्यका नाश करनेके लिये भी पर्याप्त हैं
ଏହି ଇନ୍ଦ୍ରିୟଗୁଡ଼ିକ ଯଦି ଅବିଧେୟ ହୁଅନ୍ତି, ତେବେ ନାଶ କରିବାକୁ ମଧ୍ୟ ପର୍ଯ୍ୟାପ୍ତ—ଯେପରି ଅଦାନ୍ତ, ଅନିୟନ୍ତ୍ରିତ ଘୋଡ଼ାମାନେ ପଥରେ ହିଁ କୁସାରଥିକୁ ମାରିଦିଅନ୍ତି।
वैशम्पायन उवाच