Divodāsa–Mādhavī Saṃvāda: Pratardana-janma and Kanyā-niryātana (दिवोदास–माधवी संवादः / प्रतर्दन-जननम् / कन्या-निर्यातनम्)
प्रसूत्यन्ते प्रसूत्यन्ते कन्यैव त्वं भविष्यसि । स त्वं ददस्व मां राजे प्रतिगृह्म हयोत्तमान्,यह सुनकर उस कन्याने महर्षि गालवसे कहा--'मुने! मुझे किन्हीं वेदवादी महात्माने यह एक वर दिया था कि तुम प्रत्येक प्रसवके अन्तमें फिर कन्या ही हो जाओगी। अतः आप दो सौ उत्तम घोड़े लेकर मुझे राजाको सौंप दें
prasūtyante prasūtyante kanyaiva tvaṁ bhaviṣyasi | sa tvaṁ dadasva māṁ rāje pratigṛhṇa hayottamān |
ସେ କହିଲା— “ପ୍ରତ୍ୟେକ ପ୍ରସବର ଶେଷରେ ମୁଁ ପୁଣି କନ୍ୟା ହୋଇଯିବି। ତେଣୁ ମୋତେ ରାଜାଙ୍କୁ ସମର୍ପଣ କର; ଏବଂ ସେ ଏହି ଉତ୍ତମ ଅଶ୍ୱଗୁଡ଼ିକୁ ଗ୍ରହଣ କରୁନ୍ତୁ।”
नारद उवाच