Gālava’s Eastern Ascent with Garuḍa; Counsel on Kāla and Upāya (उद्योगपर्व, अध्याय ११०)
ऋते नारायण देवं नरं वा जिष्णुमव्ययम् । अत्र कैलासमित्युक्त स्थानमैलविलस्य तत्,द्विजश्रेष्ठ! मनुष्य ज्यों-ज्यों गंगामहाद्वारसे आगे बढ़ता है, वैसे-ही-वैसे वहाँकी हिमराशिमें गलता जाता है। विप्रवर गालव! साक्षात् भगवान् नारायण तथा विजयशील अविनाशी महात्मा नरको छोड़कर दूसरा कोई मनुष्य पहले कभी गंगामहाद्वारसे आगे नहीं गया है। इसी दिशामें कैलासपर्वत है, जो कुबेरका स्थान बताया गया है
ṛte nārāyaṇa-devaṃ naraṃ vā jiṣṇum avyayam | atra kailāsam ity uktaṃ sthānam ailavilasya tat, dvijaśreṣṭha |
ୟୁପର୍ଣ୍ଣ କହିଲେ—“ଦିବ୍ୟ ନାରାୟଣଦେବ ଓ ଜିଷ୍ଣୁ, ଅବିନାଶୀ ନର ବ୍ୟତୀତ ପୂର୍ବେ କୌଣସି ମନୁଷ୍ୟ ଗଙ୍ଗାମହାଦ୍ୱାରର ପରେ ଯାଇନାହିଁ। ହେ ଦ୍ୱିଜଶ୍ରେଷ୍ଠ, ଏହି ଦିଗରେ ‘କୈଲାସ’ ନାମକ ପର୍ବତ—ଏଇଲବିଲ (କୁବେର)ଙ୍କ ସ୍ଥାନ ବୋଲି କୁହାଯାଏ।”
युपर्ण उवाच