अध्याय ७२ — राजधर्मः: प्रजारक्षण, कर-नीति, दण्ड-नीति, अमात्य-नियोजन
Chapter 72 — Royal Duty: protection of subjects, taxation, punishment, and appointments
यदल्ला कुरुते धर्म प्रजा धर्मेण पालयन् । दशवर्षसहस्राणि तस्य भुंक्ते फलं दिवि,और प्रजाका धर्मपूर्वक पालन करनेके कारण राजा एक दिनमें जिस धर्मका भागी होता है, उसका फल वह दस हजार वर्षोतक स्वर्गलोकमें रहकर भोगता है
yad ahar kurute dharmaṁ prajā dharmeṇa pālayan | daśavarṣasahasrāṇi tasya bhuṅkte phalaṁ divi ||
ଧର୍ମପୂର୍ବକ ପ୍ରଜାଙ୍କୁ ପାଳନ କରି ରାଜା ଏକ ଦିନରେ ଯେ ଧର୍ମ ଅର୍ଜନ କରନ୍ତି, ତାହାର ଫଳ ସେ ସ୍ୱର୍ଗଲୋକରେ ଦଶ ହଜାର ବର୍ଷ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଭୋଗନ୍ତି।
भीष्म उवाच