Daṇḍanīti and the King as the Cause of Yuga-Order (दण्डनीतिः राजधर्मश्च युगकारणत्वम्)
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ६२ “लोक हैं।) भीकम (2 अमान एकोनसप्ततितमो<ध्याय: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन युधिछिर उवाच पार्थिवेन विशेषेण कि कार्यमवशिष्यते । कथं रक्ष्यो जनपद: कथं जेयाश्लू शत्रव:,युधिष्ठिरने पूछा--पितामह! राजाके द्वारा विशेष रूपसे पालन करने योग्य और कौन-सा कार्य शेष है? उसे गाँवोंकी रक्षा कैसे करनी चाहिये और शत्रुओंको किस प्रकार जीतना चाहिये?
Yudhiṣṭhira uvāca | pārthivena viśeṣeṇa kiṁ kāryam avaśiṣyate | kathaṁ rakṣyo janapadaḥ kathaṁ jeyāś ca śatravaḥ ||
ଯୁଧିଷ୍ଠିର କହିଲେ—ପିତାମହ! ରାଜାଙ୍କ ପାଇଁ ବିଶେଷଭାବେ ଆଉ କେଉଁ କର୍ତ୍ତବ୍ୟ ଅବଶିଷ୍ଟ ଅଛି? ଜନପଦ ଓ ଗ୍ରାମମାନଙ୍କୁ କିପରି ରକ୍ଷା କରିବା ଉଚିତ, ଏବଂ ଶତ୍ରୁମାନଙ୍କୁ କେମିତି ଜୟ କରିବା ଉଚିତ?
युधिछिर उवाच