Trita in the Well (Udapāna-kathā) — Balarāma’s Tīrtha Observances
इस प्रकार श्रीमह्या भारत शल्यपवके अन्तर्गत गदापवमें बलरामजीका आगमनविषयक चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ,ततो महात्मा नियमे स्थितात्मा पुण्येषु तीर्थेषु वसूनि राजन् | ददौ द्विजेभ्य: क्रतुदक्षिणा श्र यदुप्रवीरो हलभृत् प्रतीत: राजन! यदुकुलके प्रमुख वीर हलधारी महात्मा बलराम नियमपूर्वक रहकर प्रसन्नताके साथ पुण्यतीथोमें ब्राह्मगोंको धन और यज्ञकी दक्षिणाएँ देते थे
tato mahātmā niyame sthitātmā puṇyeṣu tīrtheṣu vasūni rājan | dadau dvijebhyaḥ kratudakṣiṇāś ca yadūpravīro halabhṛt pratītaḥ ||
ସଞ୍ଜୟ କହିଲେ— ତାପରେ ମହାତ୍ମା, ନିୟମରେ ସ୍ଥିରଚିତ୍ତ ଓ ସଂଯମୀ, ଯଦୁକୁଳର ଅଗ୍ରଣୀ ହଳଧାରୀ ବଳରାମ, ହେ ରାଜନ, ପୁଣ୍ୟତୀର୍ଥମାନେ ଭ୍ରମଣ କରି ଆନନ୍ଦରେ ବ୍ରାହ୍ମଣମାନଙ୍କୁ ଧନ ଓ ଯଜ୍ଞ-ଦକ୍ଷିଣା ଦାନ କରୁଥିଲେ।
संजय उवाच