अध्याय ३: कृपस्य दुर्योधनं प्रति नीत्युपदेशः
Kṛpa’s Counsel to Duryodhana
यदि सर्वेजत्र तिष्ठामो ध्रुवं नो विजयो भवेत् | 'पाण्डवोंके पास थोड़ी-सी ही सेना शेष रह गयी है और श्रीकृष्ण तथा अर्जुन भी बहुत घायल हो चुके हैं। यदि हम सब लोग यहाँ डटे रहें तो निश्चय ही हमारी विजय होगी ।।
ଯଦି ଆମେ ସମସ୍ତେ ଏଠାରେ ଦୃଢ଼ ଭାବେ ଦଢ଼ି ରହିବା, ତେବେ ନିଶ୍ଚୟ ଆମର ବିଜୟ ହେବ। ପାଣ୍ଡବମାନଙ୍କ ସେନା ଅତି ଅଳ୍ପ ମାତ୍ର ଶେଷ ରହିଛି, ଏବଂ ଶ୍ରୀକୃଷ୍ଣ ଓ ଅର୍ଜୁନ ମଧ୍ୟ ଭାରି ଆହତ; ତେଣୁ ଏଠାରେ ଅଟୁଟ ରହିଲେ ଜୟ ଧ୍ରୁବ।
संजय उवाच