पुत्रो! तुम सदाचारी और मेरे लिये प्राणोंसे भी अधिक प्यारे हो। मैंने बड़े कष्टसे तुम्हें पाया है; अतः तुम्हें छोड़कर अलग नहीं रहूँगी। मैं भी तुम्हारे साथ वनमें चलूँगी। हाय कृष्णे! तुम क्यों मुझे छोड़े जाती हो? ।। अन्तवत्यसुधर्मेडस्मिन् धात्रा कि नु प्रमादतः । ममान्तो नैव विहितस्तेनायुर्न जहाति माम्
antavaty asu dharme 'smin dhātrā kiṃ nu pramādataḥ | mamānto naiva vihitas tenāyur na jahāti mām ||
ଏହି ନଶ୍ୱର ଲୋକରେ କି ବିଧାତା ପ୍ରମାଦବଶତଃ ମୋ ପାଇଁ ଅନ୍ତ ନିୟତ କରିନାହାନ୍ତି? ମୋର ମୃତ୍ୟୁ ନିର୍ଦ୍ଧାରିତ ହୋଇନାହିଁ; ସେଥିପାଇଁ ମୋର ଆୟୁ ମୋତେ ଛାଡ଼ୁନାହିଁ।
वैशमग्पायन उवाच