Dhṛtarāṣṭra–Saṃjaya Saṃvāda: Anuśocana, Nimittāni, and Vidura’s Warning
क्रोधाविष्टेषु पार्थषु धार्तराष्ट्रेषु चाप्यति । द्रौपदी पाण्डुपुत्राणां कृष्णा शान्तिरिहा भवत्,कुन्तीके पुत्र तथा धृतराष्ट्रके पुत्र सभी एक-दूसरेके प्रति अत्यन्त क्रोधसे भरे हुए थे, ऐसे समयमें यह ट्रुपदकुमारी कृष्णा इन पाण्डवोंको परम शान्ति देनेवाली बन गयी
ପାର୍ଥମାନେ ଓ ଧୃତରାଷ୍ଟ୍ରପୁତ୍ରମାନେ କ୍ରୋଧାବିଷ୍ଟ ହୋଇଥିବାବେଳେ, ପାଣ୍ଡୁପୁତ୍ରମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଦ୍ରୌପଦୀ—କୃଷ୍ଣା—ଏଠାରେ ଶାନ୍ତିର କାରଣ ହେଲେ।
कर्ण उवाच