Śakrasya Divyā Sabhā
Indra’s Radiant Assembly Hall
बिश्रद् वपुरनिर्देश्यं किरीटी लोहिताड़द: । विरजोअम्बरकश्षित्रमाल्यो ह्वीकीर्तिद्युतिभि: सह,उस समय वे अवर्णनीय रूप धारण करते हैं। उनके मस्तकपर किरीट रहता है और दोनों भुजाओंमें लाल रंगके बाजूबंद शोभा पाते हैं। उनके शरीरपर स्वच्छ वस्त्र और कण्ठमें विचित्र माला सुशोभित होती है। वे लज्जा, कीर्ति और कान्ति--इन देवियोंके साथ उस दिव्य सभामें विराजमान होते हैं
visphurad vapuḥ anirdeśyaṃ kirīṭī lohitāṅgadaḥ | virajo’mbara-kaś citra-mālyo hrī-kīrti-dyutibhiḥ saha ||
ସେ ସମୟରେ ତାଙ୍କର ରୂପ ଅବର୍ଣ୍ଣନୀୟ ଭାବେ ଦୀପ୍ତ ହୁଏ। ମସ୍ତକରେ କିରୀଟ, ଭୁଜାରେ ଲାଲ ଅଙ୍ଗଦ, ଦେହରେ ନିର୍ମଳ ବସ୍ତ୍ର ଏବଂ କଣ୍ଠରେ ବିଚିତ୍ର ମାଳା ଶୋଭା ପାଏ। ସେଇ ଦିବ୍ୟ ସଭାରେ ସେ ହ୍ରୀ, କୀର୍ତ୍ତି ଓ ଦ୍ୟୁତି—ଏହି ଦେବୀମାନଙ୍କ ସହ ବିରାଜିତ।
नारद उवाच