Śakrasya Divyā Sabhā
Indra’s Radiant Assembly Hall
कक्षीवान् गौतमस्ताक्ष्यस्तथा वैश्वानरो मुनि: । (षर्डर्तु: कवषो धूम्रो रैभ्यो नलपरावसू । स्वस्त्यात्रेयो जरत्कारु: कहोल: काश्यपस्तथा । विभाण्डकर्ष्यशूज्रौ च उन्मुखो विमुखस्तथा ।।) मुनि: कालकवृक्षीय आश्राव्यो5थ हिरण्मय:,भरतवंशी नरेश पाण्डुनन्दन! सहदेव, सुनीथ, महातपस्वी वाल्मीकि, सत्यवादी शमीक, सत्यप्रतिज्ञ प्रचेता, मेधातिथि, वामदेव, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, मरुत्त, मरीचि, महातपस्वी स्थाणु, कक्षीवान्, गौतम, तार्क्ष्य, वैश्वानर मुनि, षडर्तु, कवष, धूम्र, रैभ्य, नल, परावसु, स्वस्त्यात्रेय, जरत्कारु, कहोल, काश्यप, विभाण्डक, ऋष्यशृंग, उन्मुख, विमुख, कालकवृक्षीय मुनि, आश्राव्य, हिरण्मय, संवर्त, देवहव्य, पराक्रमी विष्वक्सेन, कण्व, कात्यायन, गार्ग्य, कौशिक, दिव्य जल, ओषधियाँ, श्रद्धा, मेधा, सरस्वती, अर्थ, धर्म, काम, विद्युत, जलधर मेघ, वायु, गर्जना करनेवाले बादल, प्राची दिशा, यज्ञके हविष्यको वहन करनेवाले सत्ताईस पावक,- सम्मिलित अग्नि और सोम, संयुक्त इन्द्र और अग्नि, मित्र, सविता, अर्यमा, भग, विश्वेदेव, साध्य, बृहस्पति, शुक्र, विश्वावसु, चित्रसेन, सुमन, तरुण, विविध यज्ञ, दक्षिणा, ग्रह, तारा और यज्ञनिर्वाहक मन्त्र--ये सभी वहाँ इन्द्रसभामें बैठते हैं
kakṣīvān gautamas tārkṣyas tathā vaiśvānaro muniḥ | ṣaḍṛtuḥ kavaṣo dhūmro raibhyo nala-parāvasū | svastyātreyo jaratkāruḥ kaholaḥ kāśyapas tathā | vibhāṇḍaka ṛṣyaśṛṅgaś ca unmukho vimukhas tathā || muniḥ kālakavṛkṣīya āśrāvyo 'tha hiraṇmayaḥ ||
ନାରଦ କହିଲେ—କକ୍ଷୀବାନ, ଗୌତମ, ତାର୍କ୍ଷ୍ୟ ଏବଂ ବୈଶ୍ୱାନର ମୁନି; ଷଡୃତୁ, କବଷ, ଧୂମ୍ର, ରୈଭ୍ୟ, ନଲ ଓ ପରାବସୁ; ସ୍ୱସ୍ତ୍ୟାତ୍ରେୟ, ଜରତ୍କାରୁ, କହୋଲ ଓ କାଶ୍ୟପ; ବିଭାଣ୍ଡକ ଓ ଋଷ୍ୟଶୃଙ୍ଗ; ଉନ୍ମୁଖ ଓ ବିମୁଖ; ଏବଂ କାଳକବୃକ୍ଷୀୟ ମୁନି, ଆଶ୍ରାବ୍ୟ, ହିରଣ୍ମୟ—ଏମାନେ ମଧ୍ୟ ସେଠାରେ ଆସୀନ ଥିଲେ।
नारद उवाच