सभा-पर्यवसान-प्रस्थानवचनम् | Counsel at the Point of Departure
संसारमें बलवान् मनुष्य जिसको धर्म समझता है, धर्मविचारके समय लोग उसीको धर्म मान लेते हैं और बलहीन पुरुष जो धर्म बतलाता है, वह बलवान पुरुषके बताये धर्मसे दब जाता है (अत: इस समय कर्ण और दुर्योधनका बताया हुआ धर्म ही सर्वोपरि हो रहा है।) ।। नविवेक्तुं च ते प्रश्रमिमं शकनोमि निश्चयात् । सूक्ष्मत्वाद् गहनत्वाच्च कार्यस्यास्य च गौरवात्
na vivektuṃ ca te praśnam imaṃ śaknomi niścayāt | sūkṣmatvād gahanatvāc ca kāryasyāsya ca gauravāt ||
ଭୀଷ୍ମ କହିଲେ—ମୁଁ ନିଶ୍ଚୟରେ ତୁମ ଏହି ପ୍ରଶ୍ନର ନିର୍ଣ୍ଣୟ କରିପାରୁନି। ବିଷୟଟି ସୂକ୍ଷ୍ମ, ଗଭୀର ଭାବେ ଜଟିଳ, ଏବଂ ପରିଣାମରେ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଗୁରୁତର।
भीष्म उवाच