नारदेन दिव्यसभाः कथितुं प्रतिज्ञा
Nārada’s Prelude to Describing the Divine Assemblies
वयं तु सत्पथथं तेषां यातुमिच्छामहे प्रभो । न तु शक््यं तथा गन्तुं यथा तैर्नियतात्मभि:,प्रभो! हम भी उन्हींके उत्तम मार्गसे चलना चाहते हैं, परंतु उस प्रकार (सर्वथा) चल नहीं पाते; जैसे वे नियतात्मा महापुरुष चला करते थे
vayaṃ tu satpathaṃ teṣāṃ yātum icchāmahe prabho | na tu śakyaṃ tathā gantuṃ yathā tair niyatātmabhiḥ ||
ପ୍ରଭୋ! ଆମେ ମଧ୍ୟ ସେମାନଙ୍କ ସତ୍ପଥରେ ଚାଲିବାକୁ ଇଚ୍ଛା କରୁଛୁ; କିନ୍ତୁ ଯେପରି ନିୟତାତ୍ମା ମହାପୁରୁଷମାନେ ଚାଲୁଥିଲେ, ସେପରି ଚାଲିବା ଆମ ପାଇଁ ସମ୍ଭବ ନୁହେଁ।
युधिछिर उवाच