नारदेन दिव्यसभाः कथितुं प्रतिज्ञा
Nārada’s Prelude to Describing the Divine Assemblies
नारदेनैवमुक्तस्तु धर्मराजो युधिष्ठिर: । प्राउ्जलि र्भ्रातृभि: सार्ध तैश्व सर्वेर्द्धिजोत्तमै:,नारदजीके ऐसा कहनेपर भाइयों तथा सम्पूर्ण श्रेष्ठ ब्राह्मणोंके साथ महामनस्वी धर्मराज युधिष्ठिरने हाथ जोड़कर उनसे इस प्रकार कहा--“महर्ष! हम सभी दिव्य सभाओंका वर्णन सुनना चाहते हैं। आप उनके विषयमें सब बातें बताइये
nāradenaitam uktas tu dharmarājo yudhiṣṭhiraḥ | prāñjalir bhrātṛbhiḥ sārdhaṃ taiś ca sarvair dvijottamaiḥ ||
ନାରଦ ଏପରି କହିବା ପରେ ଧର୍ମରାଜ ଯୁଧିଷ୍ଠିର ଭାଇମାନଙ୍କ ସହ ଏବଂ ସମସ୍ତ ଶ୍ରେଷ୍ଠ ବ୍ରାହ୍ମଣମାନଙ୍କ ସହ, କରଯୋଡ଼ି, ଋଷିଙ୍କୁ ସମ୍ବୋଧନ କରି କହିଲେ।
नारद उवाच