सभा-पर्व, अध्याय 56: विदुरस्य द्यूत-निन्दा
Vidura’s Censure of Dicing and Warning to the Kurus
धघतयाट्र उवाच स्थितो5स्मि शासने क्रातुर्विदुरस्य महात्मन: । तेन संगम्य वेत्स्यामि कार्यस्यास्य विनिश्चयम्,धृतराष्ट्र बोले--बेटा! मैं अपने भाई महात्मा विदुरकी सम्मतिके अनुसार चलता हूँ। उनसे मिलकर यह जान सकूँगा कि इस कार्यके विषयमें क्या निश्चय करना चाहिये?
ଧୃତରାଷ୍ଟ୍ର କହିଲେ—ପୁତ୍ର! ମୁଁ ମୋର ଭାଇ ମହାତ୍ମା ବିଦୁରଙ୍କ ଶାସନ/ପରାମର୍ଶ ଅନୁସାରେ ଚାଲେ। ତାଙ୍କୁ ଭେଟି ଏହି କାର୍ଯ୍ୟରେ କ’ଣ ନିଶ୍ଚୟ କରିବା ଉଚିତ ଜାଣିବି।
धघतयाट्र उवाच