Adhyāya 52 (Sabhā-parva): Vidura Invites Yudhiṣṭhira to Hastināpura for the Dice Match
कैरातकीनामयुतं दासीनां च विशाम्पते । आह्त्य रमणीयार्थान् दूरजान् मृगपक्षिण:,राजन्! चन्दन और अगुरुकाष्ठ तथा कृष्णागुरुकाष्ठके अनेक भार, चर्म, रत्न, सुवर्ण तथा सुगन्धित पदार्थोकी राशि और दस हजार किरातदेशीय दासियाँ, सुन्दर-सुन्दर पदार्थ, दूर देशोंके मृग और पक्षी तथा पर्वतोंसे संगृहीत तेजस्वी सुवर्ण एवं सम्पूर्ण भेंट-सामग्री लेकर आये हुए राजालोग द्वारपर रोके जानेके कारण खड़े थे
kairātakīnām ayutaṁ dāsīnāṁ ca viśāmpate | āhṛtya ramaṇīyārthān dūrajān mṛgapakṣiṇaḥ ||
ଦୁର୍ଯ୍ୟୋଧନ କହିଲା—ହେ ପ୍ରଜାପତି ରାଜନ୍! କିରାତଦେଶରୁ ଦଶହଜାର ଦାସୀ, ମନୋହର ଦ୍ରବ୍ୟ ଏବଂ ଦୂରଦେଶରୁ ଆଣିଥିବା ମୃଗ ଓ ପକ୍ଷୀ—ଏସବୁ ଉପହାରରୂପେ ସେମାନେ ନେଇ ଆସିଛନ୍ତି।
दुर्योधन उवाच