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Shloka 30

Bhīṣma–Śiśupāla-saṃvādaḥ

Bhishma and Shishupala’s exchange in the assembly

एवं हि कथयन्त्यन्ये नरा ज्ञानविद: पुरा । भीष्म यत्‌ तदहं सम्यग्‌ वक्ष्यामि तव शृण्वतः,भीष्म! पहलेके विवेकी मनुष्य एक प्राचीन वृत्तान्त सुनाया करते हैं, वही मैं ज्यों-का- त्यों तुम्हारे सामने उपस्थित करता हूँ, सुनो

ଭୀଷ୍ମ! ପୁରାତନ କାଳରେ ଜ୍ଞାନୀ ଲୋକେ ଏଭଳି ଗୋଟିଏ ପ୍ରାଚୀନ ବୃତ୍ତାନ୍ତ କହୁଥିଲେ; ତୁମେ ଶୁଣୁଥିବାବେଳେ ସେହିଟିକୁ ମୁଁ ଯଥାର୍ଥ ଭାବେ କହିବି—ଶୁଣ।

शिशुपाल उवाच