सभा पर्व, अध्याय ३७ — युधिष्ठिरस्य भीष्मोपदेशः
Yudhiṣṭhira’s Consultation and Bhīṣma’s Counsel in the Assembly
अथ वा मन्यसे कृष्णं स्थविरं कुरुपुड्रव । वसुदेवे स्थिते वृद्धे कथमर्हति तत्सुत:,कुरुपुंगव! अथवा यदि तुम श्रीकृष्णको बड़ा-बूढ़ा समझते हो तो इसके पिता वृद्ध वसुदेवजीके रहते हुए उनका यह पुत्र कैसे पूजाका पात्र हो सकता है?
atha vā manyase kṛṣṇaṃ sthaviraṃ kuru-puṅgava | vasudeve sthite vṛddhe katham arhati tat-sutaḥ ||
ହେ କୁରୁପୁଙ୍ଗବ, ଯଦି ତୁମେ କୃଷ୍ଣଙ୍କୁ ଜ୍ୟେଷ୍ଠ ବୋଲି ମାନ, ତେବେ ତାଙ୍କ ବୃଦ୍ଧ ପିତା ବସୁଦେବ ଜୀବିତ ଓ ଉପସ୍ଥିତ ଥିବାବେଳେ ସେ ପୁତ୍ର କିପରି ପୂଜାର୍ହ ହେବ?
शिशुपाल उवाच