मागधगिरिव्रजप्रवेशः — Entry into Girivraja and Jarāsandha’s Protocol Inquiry
बृहद्रथो नरपति: परां निर्वतिमाययौ । अभिषिक्ते जरासंधे तदा राजा बूृहद्रथ: । पत्नीद्रयेनानुगतस्तपोवनचरो5भवत्,राजधानीमें प्रवेश करके अपने जाति-भाइयों और सगे-सम्बन्धियोंसे घिरे हुए मगधनरेश बृहद्रथने उसी समय जरासंधका राज्याभिषेक कर दिया। ऐसा करके उन्हें बड़ा संतोष हुआ। जरासंधका अभिषेक हो जानेपर महाराज बृहद्रथ अपनी दोनों पत्नियोंके साथ तपोवनमें चले गये
Bṛhadratho narapatiḥ parāṁ nirvṛtim āyayau | abhiṣikte Jarāsandhe tadā rājā Bṛhadrathaḥ | patnīdvayenānugatas tapovanacaro 'bhavat ||
ନରପତି ବୃହଦ୍ରଥ ପରମ ନିର୍ବୃତିକୁ ପ୍ରାପ୍ତ ହେଲେ। ଜରାସନ୍ଧଙ୍କର ବିଧିବତ୍ ଅଭିଷେକ ସମ୍ପନ୍ନ ହେବା ପରେ, ବୃହଦ୍ରଥ ନିଜ ଦୁଇ ରାଣୀ ସହିତ ତପୋବନବାସୀ ହେଲେ।
श्रीकृष्ण उवाच