Samrāt-Lakṣaṇa and the Counsel to Check Jarāsandha (सम्राट्-लक्षणं जरासन्ध-प्रतिबाधा-परामर्शः)
भये तु समतिक्रान्ते जरासंधे समुद्यते । मन्त्रो<यं मन्त्रितो राजन् कुलैरष्टादशावरै:,इससे कंसका भय तो जाता रहा; परंतु जरासंध कुपित हो हमसे बदला लेनेको उद्यत हो गया। राजन! उस समय भोजवंशके अठारह कुलों (मन्त्री-पुरोहित आदि)-ने मिलकर इस प्रकार विचार-विमर्श किया--
କଂସର ଭୟ ତ ଦୂର ହେଲା; କିନ୍ତୁ ଜରାସନ୍ଧ କ୍ରୋଧିତ ହୋଇ ଆମଠାରୁ ପ୍ରତିଶୋଧ ନେବାକୁ ଉଦ୍ୟତ ହେଲା। ରାଜନ୍! ସେତେବେଳେ ଭୋଜବଂଶର ଅଠାରୋଟି କୁଳ ଏକତ୍ର ହୋଇ ଏଭଳି ମନ୍ତ୍ରଣା କଲେ।
श्रीकृष्ण उवाच