मौसलपर्व — अध्याय ८
Arjuna’s evacuation of Dvārakā, Vasudeva’s rites, and the caravan’s crisis
व्यास उवाच (देवांशा देवदेवेन सम्मतास्ते गता: सह । धर्मव्यवस्थारक्षार्थ देवेन समुपेक्षिता: ।।) व्यासजी बोले--कुन्तीकुमार! वे समस्त यदुवंशी देवताओंके अंश थे। वे देवाधिदेव श्रीकृष्णके साथ ही यहाँ आये थे और साथ ही चले गये। उनके रहनेसे धर्मकी मर्यादाके भंग होनेका डर था; अतः भगवान् श्रीकृष्णने धर्म-व्यवस्थाकी रक्षाके लिये उन मरते हुए यादवोंकी उपेक्षा कर दी ।। ब्रह्मशापविनिर्दग्धा वृष्ण्यन्धकमहारथा:,कुरुश्रेष्ठ! वृष्णि और अन्धकवंशके महारथी ब्राह्मणोंके शापसे दग्ध होकर नष्ट हुए हैं; अतः तुम उनके लिये शोक न करो। उन महामनस्वी वीरोंकी भवितव्यता ही ऐसी थी। उनका प्रारब्ध ही वैसा बन गया था
vyāsa uvāca | devāṃśā devadevena sammatās te gatāḥ saha | dharmavyavasthārakṣārthaṃ devena samupeksitāḥ ||
ବ୍ୟାସ କହିଲେ—କୁନ୍ତୀପୁତ୍ର! ସେ ସମସ୍ତ ଯାଦବ ଦେବତାମାନଙ୍କର ଅଂଶ ଥିଲେ। ଦେବଦେବ ଶ୍ରୀକୃଷ୍ଣଙ୍କ ସମ୍ମତିରେ ସେମାନେ ତାଙ୍କ ସହିତ ଏଠାକୁ ଆସିଥିଲେ ଏବଂ ତାଙ୍କ ସହିତ ହିଁ ପ୍ରସ୍ଥାନ କରିଗଲେ। ସେମାନେ ରହିଲେ ଧର୍ମ-ସୀମା ଭଙ୍ଗ ହେବାର ଆଶଙ୍କା ଥିଲା; ତେଣୁ ଧର୍ମ-ବ୍ୟବସ୍ଥାର ରକ୍ଷା ପାଇଁ ଭଗବାନ ଶ୍ରୀକୃଷ୍ଣ ସେମାନଙ୍କ ବିନାଶକାଳେ ଜାଣିଶୁଣି ଉପେକ୍ଷା କଲେ।
व्यास उवाच