अभिमन्योरावरणम्
Encirclement and counter-strikes of Abhimanyu
स तस्य भुजनिर्मुक्तो लक्ष्मणस्य सुदर्शनम् । सुनसं सुभ्रु केशान्तं शिरो5हार्षीत् सकुण्डलम्,अभिमन्युके हाथोंसे छूटे हुए उस भल्लने लक्ष्मणके देखनेमें सुन्दर, सुधड़ नासिका, मनोहर भौंह, सुन्दर केशान्तभाग और रुचिर कुण्डलोंसे युक्त मस्तकको धड़से अलग कर दिया
ଅଭିମନ୍ୟୁଙ୍କ ହାତରୁ ଛୁଟିଥିବା ସେହି ଭଲ୍ଲବାଣ, ଲକ୍ଷ୍ମଣଙ୍କ ସୁଦର୍ଶନ, ସୁଘଡ଼ ନାସିକା, ମନୋହର ଭୌହ, ସୁନ୍ଦର କେଶାନ୍ତ ଓ ରୁଚିର କୁଣ୍ଡଳ-ଶୋଭିତ ମସ୍ତକକୁ ଧଡ଼ରୁ ବିଚ୍ଛିନ୍ନ କରିଦେଲା।
संजय उवाच