Droṇa-parva Adhyāya 114 — Karṇa–Bhīmasena Missile Exchange, Disarmament, and Arjuna’s Intervention
यत्ता मदर्थे तिष्ठन्ति कुरुवीराभिरक्षिता: । अप्रमत्ता महाराज मामेव प्रत्युपस्थिता:,“भरतनन्दन! दुर्योधनकी क्रोधमें भरी हुई ये कई अक्षौहिणी सेनाएँ कौरववीरोंसे सुरक्षित हो मेरे लिये तैयार खड़ी हैं। महाराज! ये सब सावधान होकर मुझपर ही आक्रमण करनेवाली हैं
ସେମାନେ ମୋର ନିମିତ୍ତେ ଉଦ୍ୟତ ହୋଇ ଦଣ୍ଡାୟମାନ, କୌରବବୀରମାନଙ୍କ ରକ୍ଷାରେ। ହେ ମହାରାଜ! ସେମାନେ ସମସ୍ତେ ଅପ୍ରମତ୍ତ ହୋଇ କେବଳ ମୋ ପ୍ରତି ହିଁ ଆକ୍ରମଣ କରିବାକୁ ଉପସ୍ଥିତ।
संजय उवाच