Duryodhana’s Anxiety, Bhīṣma’s Reassurance, and Renewed Mobilization (दुर्योधनचिन्ता–भीष्मप्रत्याश्वासन–सेनानिर्गमनम्)
सत्यव्रतं च सप्तत्या विद्ध्वा शक्रसमो युधि । नृत्यन्निव रणे वीर आर्ति न: समजीजनत्,युद्धमें इन्द्रके समान पराक्रमी वीर अभिमन्युने सत्यव्रतको सत्तर बाणोंसे घायल करके रणांगणमें नृत्य-सा करते हुए हम सब लोगोंको अत्यन्त पीड़ित कर दिया
satyavrataṃ ca saptatyā viddhvā śakrasamo yudhi | nṛtyann iva raṇe vīra ārtim naḥ samajījanat ||
ସଞ୍ଜୟ କହିଲେ—ଯୁଦ୍ଧରେ ଶକ୍ରସମ ପରାକ୍ରମୀ ବୀର ଅଭିମନ୍ୟୁ ସତ୍ୟବ୍ରତକୁ ସପ୍ତତି ବାଣରେ ବିଦ୍ଧ କରି, ରଣଭୂମିରେ ନୃତ୍ୟ କରୁଥିବା ପରି ଚଳି, ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଯନ୍ତ୍ରଣା ଦେଲା।
संजय उवाच