Adhyāya 108 — Nimitta-darśana and Drona’s counsel amid Arjuna’s advance (निमित्तदर्शनं द्रोणोपदेशश्च)
रक्ष्यममाणो हि समरे भीष्मो5स्माकं पितामह: । निहन्यात् समरे यत्तान् पज्चालान् पाण्डवै:ः सह,“वीर! तुम्हें उन महात्मा भीष्मकी रक्षा करनी चाहिये। युद्धमें सुरक्षित रहनेपर हमारे पितामह भीष्म समरांगणमें विजयके लिये प्रयत्न करनेवाले पाण्डवोंसहित पांचालोंका संहार कर डालेंगे
sañjaya uvāca | rakṣyamāṇo hi samare bhīṣmo 'smākaṃ pitāmahaḥ | nihanyāt samare yattān pāñcālān pāṇḍavaiḥ saha |
କାରଣ ଯଦି ଯୁଦ୍ଧରେ ଆମ ପିତାମହ ଭୀଷ୍ମଙ୍କୁ ରକ୍ଷା କରାଯାଏ, ତେବେ ବିଜୟ ପାଇଁ ଯତ୍ନ କରୁଥିବା ସେଇ ପାଞ୍ଚାଳମାନଙ୍କୁ ପାଣ୍ଡବମାନଙ୍କ ସହ ରଣରେ ନିହତ କରିଦେବେ।
संजय उवाच