तमोगुण-निरूपण
Analysis of Tamas and its Marks
अभिष्वड्डस्तु कामेषु महामोह इति स्मृत: । ऋषयो मुनयो देवा मुहान्त्यत्र सुखेप्सव:,यह जो भोगोंमें आसक्त हो जाना है, यही महामोह बताया गया है। इस मोहमें पड़कर भोगोंका सुख चाहनेवाले ऋषि, मुनि और देवगण भी मोहित हो जाते हैं (फिर साधारण मनुष्योंकी तो बात ही क्या है?)
abhiṣvaḍḍas tu kāmeṣu mahāmoha iti smṛtaḥ | ṛṣayo munayo devā muhānty atra sukhepsavaḥ ||
ଭୋଗବିଷୟରେ ଆସକ୍ତି ହେବାକୁ ‘ମହାମୋହ’ ବୋଲି ସ୍ମୃତି କହେ। ଏହି ମୋହରେ ପଡି ସୁଖ ଚାହୁଁଥିବା ଋଷି, ମୁନି ଓ ଦେବଗଣ ମଧ୍ୟ ମୋହିତ ହୋଇଯାନ୍ତି।
वायुदेव उवाच