अश्रमवासिनां विषादः — Lament in Hastināpura after the Elders’ Forest Withdrawal
मासमेकं विजहुस्ते ससैन्यान्तःपुरा वने । अथ तत्रागमद् व्यासो यथोक्त ते मयानघ,वे सेनाओं तथा अन्तःपुरकी स्त्रियोंक साथ वहाँ एक मासतक वनमें विहार करते रहे। अनघ! इसी बीचमें जैसा कि मैंने तुम्हें बताया है, वहाँ व्यासजीका आगमन हुआ
māsam ekaṁ vijahus te sa-sainyāntaḥpurā vane | atha tatrāgamad vyāso yathoktaḥ te mayānagha ||
ସେମାନେ ସେନା ଓ ଅନ୍ତଃପୁରର ନାରୀମାନଙ୍କ ସହ ବନରେ ଏକ ମାସ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ରହିଲେ। ହେ ଅନଘ, ମୁଁ ଯେପରି କହିଥିଲି, ସେହି ସମୟରେ ସେଠାକୁ ବ୍ୟାସଙ୍କ ଆଗମନ ହେଲା।
वैशम्पायन उवाच