Devaśarmā–Vipula Dialogue on Ahorātra–Ṛtu as Moral Witnesses (अनुशासन पर्व, अध्याय ४३)
असज्जन्त प्रजा: सर्वा: कामक्रोधवशं गता: । वे मतवाली युवतियाँ कामलोलुप होकर पुरुषोंको सदा बाधा देती रहती हैं। देवेश्वर भगवान् ब्रह्माने कामकी सहायताके लिये क्रोधको उत्पन्न किया। इन्हीं काम और क्रोधके वशीभूत होकर स्त्री और पुरुषरूप सारी प्रजा परस्पर आसक्त होती है
asajjanta prajāḥ sarvāḥ kāmakrodhavaśaṃ gatāḥ |
ଭୀଷ୍ମ କହିଲେ—ସମସ୍ତ ପ୍ରଜା କାମ ଓ କ୍ରୋଧର ବଶରେ ପଡ଼ି ଆସକ୍ତ ହୁଏ। କାମକୁ ସହାୟ କରିବା ପାଇଁ ଦେବେଶ୍ୱର ବ୍ରହ୍ମା କ୍ରୋଧକୁ ସୃଷ୍ଟି କଲେ; ଏହି କାମ-କ୍ରୋଧର ଅଧୀନ ହୋଇ ସ୍ତ୍ରୀ-ପୁରୁଷରୂପ ସମଗ୍ର ପ୍ରଜା ପରସ୍ପର ଆସକ୍ତିରେ ବନ୍ଧିତ ହୁଏ।
भीष्म उवाच