पिशाचान् पक्षिणो नागान् पशूंश्चवैव सहस्रश:,कृष्णमशभ्युद्यतास्त्रं च नादं मुमुचुरुल्बणम् | उन्होंने उस जलते हुए वनको और मारनेके लिये अस्त्र उठाये हुए श्रीकृष्ण तथा अर्जुनको देखा। उत्पात और आर्तनादके शब्दसे उस वनमें खड़े हुए वे सभी प्राणी संत्रस्त- से हो उठे थे। उस वनको अनेक प्रकारसे दग्ध होते देख और अस्त्र उठाये हुए श्रीकृष्णपर दृष्टि डाल भयानक आर्तनाद करने लगे
piśācān pakṣiṇo nāgān paśūṁś caiva sahasraśaḥ | kṛṣṇam abhyudyatāstraṁ ca nādaṁ mumucur ulbaṇam ||
ବୈଶମ୍ପାୟନ କହିଲେ—ହଜାର ହଜାର ପିଶାଚ, ପକ୍ଷୀ, ନାଗ ଓ ପଶୁ—ଏବଂ ଅସ୍ତ୍ର ଉଠାଇଥିବା ଶ୍ରୀକୃଷ୍ଣଙ୍କୁ—ଦେଖି, ଜ୍ୱଳନ୍ତ ବନମଧ୍ୟରେ ସେମାନେ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଭୟଭୀତ ହୋଇ ଘୋର ଉଲ୍ବଣ କୋଳାହଳ କଲେ। ଦାବାନଳରେ ଘେରା ପଡ଼ି ଭୟାର୍ତ୍ତ ହୋଇ ସେମାନେ କରୁଣ ବିଲାପ କରିଲେ।
वैशम्पायन उवाच