Saṃvaraṇa–Tapatī Vivāhaḥ (The Marriage of Saṃvaraṇa and Tapatī) — Mahābhārata, Ādi Parva 163
तथापि परिभूयैन प्रेक्षमाणो वृकोदर: । राक्षसं भुझुक्त एवान्नं पाण्डव: परवीरहा,तो भी शत्रुवीरोंका संहार करनेवाले पाण्डुनन्दन भीमसेन उस राक्षसकी ओर देखते हुए उसका तिरस्कार करके उस अन्नको खाते ही रहे। तब उसने अत्यन्त अमर्षमें भरकर कुन्तीनन्दन भीमसेनके पीछे खड़े हो अपने दोनों हाथोंसे उनकी पीठपर प्रहार किया
tathāpi paribhūyaiva prekṣamāṇo vṛkodaraḥ | rākṣasaṁ bhuñjukta evānnaṁ pāṇḍavaḥ paravīrahā ||
ତଥାପି ଶତ୍ରୁବୀର-ହନ୍ତା ପାଣ୍ଡବ ବୃକୋଦର ରାକ୍ଷସକୁ ଦେଖି ମଧ୍ୟ ତାକୁ ତିରସ୍କାର କରି ଅନ୍ନ ଖାଇ ଚାଲିଲେ।
वैशम्पायन उवाच