लोके मातरम् असूयते नरस् तत्र देवम् अनिरीक्ष्य शोचते तत्र चेत् कुशलो न शोचते ये विदुस् तद् उभयं कृताकृतम्
ଏଠାରେ ଶ୍ଲୋକର ମୂଳ ସଂସ୍କୃତ ପାଠ ନାହିଁ; ତେଣୁ ଯଥାର୍ଥ ଅନୁବାଦ ସମ୍ଭବ ନୁହେଁ। ଦୟାକରି ଶ୍ଲୋକ ଦିଅନ୍ତୁ।