अस्त्रग्रामम् अशेषं च प्रोक्तमात्रम् अवाप्य तौ ऊचतुर् व्रियतां या ते दातव्या गुरुदक्षिणा //
ଏହା ତେଇଶତମ ଶ୍ଲୋକ—ଏଠାରେ କେବଳ ସଂଖ୍ୟା ଅଛି; ଅର୍ଥନିର୍ଣ୍ଣୟ ସମ୍ଭବ ନୁହେଁ।