Udyoga Parva, Adhyāya 148: Vāsudeva’s Report—Mobilization and the Nīti Sequence
Sāma–Bheda–Daṇḍa
पूरुर्यवीयांश्व॒ ततो यो5स्माकं वंशवर्धन: । शर्मिष्ठया सम्प्रसूतो दुहित्रा वृषपर्वण:,“ययातिके पाँच पुत्र हुए, जो सब-के-सब श्रेष्ठ राजर्षि थे। उनमें महातेजस्वी एवं शक्तिशाली ज्येष्ठ पुत्र यदु थे और सबसे छोटे पुत्रका नाम पूरु हुआ, जिन्होंने हमारे इस वंशकी वृद्धि की है। वे वृषपर्वाकी पुत्री शर्मिष्ठाके गर्भसे उत्पन्न हुए थे
pūrur yavīyān ca tato yo ’smākaṃ vaṃśa-vardhanaḥ | śarmiṣṭhayā samprasūto duhitṛā vṛṣaparvaṇaḥ ||
ထို့နောက် အငယ်ဆုံးဖြစ်သော ပူရု (Pūru) ရှိ၏။ သူသည် ကျွန်ုပ်တို့၏ ဝంశကို တိုးပွားစေသူ ဖြစ်လာ၏။ သူသည် ဝೃષပರ್ವန် (Vṛṣaparvan) ၏ သမီး ရှာမိဋ္ဌာ (Śarmiṣṭhā) မှ မွေးဖွားလာ၏။
वायुदेव उवाच