अध्याय ३: कृपस्य दुर्योधनं प्रति नीत्युपदेशः
Kṛpa’s Counsel to Duryodhana
ऑपन--माजल बछ। जि तृतीयो<थध्याय: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना संजय उवाच शृणु राजन्नवहितो यथावृत्तो महान् क्षय: । कुरूणां पाण्डवानां च समासाद्य परस्परम्,संजय कहते हैं--राजन्! कौरवों और पाण्डवोंके आपसमें भिड़नेसे जिस प्रकार महान् जनसंहार हुआ है, वह सब सावधान होकर सुनिये
sañjaya uvāca | śṛṇu rājann avahito yathāvṛtto mahān kṣayaḥ | kurūṇāṃ pāṇḍavānāṃ ca samāsādya parasparam ||
စဉ္ဇယ မိန့်သည်– «အရှင်ဘုရင်၊ သတိထား၍ နားထောင်ပါ။ ကုရုတို့နှင့် ပाण्डဝတို့ အပြန်အလှန် တိုက်မိကြသည့်အခါ မဟာပျက်စီးမှု မည်သို့ ဖြစ်ပွားခဲ့သည်ကို ငါသည် ဖြစ်ရပ်မှန်အတိုင်း ပြောပြမည်»။
संजय उवाच