राजधर्मस्य नवनीतम्—रक्षा, दण्ड, चार, उत्थान
Rājadharma’s ‘Essence’: Protection, Punishment, Intelligence, and Royal Diligence
न च शत्रुरवज्ञेयो दुर्बलोडपि बलीयसा । अल्पो5पि हि दहत्यग्निर्विषमल्पं हिनस्ति च,“बलवान् पुरुष कभी दुर्बल शत्रुकी भी अवहेलना न करे अर्थात् उसे छोटा समझकर उसकी ओरसे लापरवाही न दिखावे; क्योंकि आग थोड़ी-सी हो तो भी जला डालती है और विष कम मात्रामें हो तो भी मार डालता है
Janganlah musuh dipandang remeh, walaupun lemah berbanding yang kuat. Kerana api walau sedikit tetap membakar, dan racun walau sedikit tetap membunuh.
भीष्म उवाच