Jarā’s Account and the Enthronement of Jarāsandha (जरासंधोत्पत्तिः अभिषेकश्च)
एकाक्षिबाहुचरणे अर्धोदरमुखस्फिचे । दृष्टवा शरीरशकले प्रवेपतुरुभे भूशम्,प्रत्येक टुकड़ेमें एक आँख, एक हाथ, एक पैर, आधा पेट, आधा मुँह और कटिके नीचेका आधा भाग था। एक शरीरके उन टुकड़ोंको देखकर वे दोनों भयके मारे थर-थर काँपने लगीं
श्रीकृष्ण उवाच