Raibhya-putrayoḥ satra-vṛttāntaḥ — The Satra Episode of Raibhya’s Sons
Parāvasu and Arvāvasu
न मया ब्रह्माहत्येयं कृतेत्याह पुन: पुन: । उच्चमानो<5सकृप्प्रेष्यैर््रह्मह॒ज्निति भारत,लोमशजी कहते हैं--प्रजानाथ! परावसुकी यह बात सुनते ही राजाने अपने सेवकोंको यह आज्ञा दी कि “अर्वावसुको भीतर न आने दो।” राजन्! उस समय सेवकोंद्वारा हटाये जानेपर अर्वावसुने बार-बार यह कहा कि -मैंने ब्रह्महत्या नहीं की है।' भारत! तो भी राजाके सेवक उन्हें ब्रह्महत्यारा कहकर ही सम्बोधित करते थे
na mayā brahmahatyeyaṁ kṛtety āha punaḥ punaḥ | uccamāno 'sakṛt preṣyair brahmahajñ iti bhārata ||
तो पुन्हा पुन्हा म्हणत राहिला—“मी ब्रह्महत्या केलेली नाही.” पण हे भारत! सेवक त्याला वारंवार हाकलून देत असतानाही “ब्रह्महत्यारा” असेच म्हणत राहिले.
लोगश उवाच