Udyoga-parva Adhyāya 30: Sañjaya’s Departure and Yudhiṣṭhira’s Commission of Greetings
एवं पूर्वापरान् क्लेशानतितिक्षन्त पाण्डवा: । बलीयांसो5पि सन्तो यत् तत् सर्व कुरवो विदु:,“इसी प्रकार पाण्डवोंने अत्यन्त बलिष्ठ होते हुए भी जो (तुम्हारे दिये हुए) पहले और पीछेके सभी क्लेशोंको सहन किया है, उसे सब कौरव जानते हैं
evaṁ pūrvāparān kleśān atitikṣanta pāṇḍavāḥ | balīyāṁso 'pi santaḥ yat tat sarvaṁ kuravo viduḥ ||
अशा रीतीने पांडव अत्यंत बलवान असूनही तुमच्याकडून आलेले पूर्वीचे व नंतरचे सर्व क्लेश सहन करीत राहिले—हे सर्व कौरव जाणतात।
युधिछिर उवाच