Karma-Saṃnyāsa–Karma-Yoga Saṃvāda
Renunciation and the Discipline of Action
सम्बन्ध--गनुष्यका स्वधर्मपालन करनेगें ही कल्याण है, परधर्मका सेवन और निषिद्ध कमोंका आचरण करनेमें सब प्रकारसे हानि है। इस बातको भलीभॉति समझ लेनेके बाद भी मनुष्य अपने इच्छा; विचार और धर्मके विरुद्ध पापाचारमें किस कारण प्रवृत्त हो जाते हैं? इस बातको जाननेकी इच्छासे अर्जुन पूछते हैं-- अजुन उवाच अथ केन प्रयुक्तो5यं पापं चरति पूरुष: । अनिच्छन्नपि वार्ष्णेय बलादिव नियोजित:,अर्जुन बोले--हे कृष्ण! तो फिर यह मनुष्य स्वयं न चाहता हुआ भी बलात् लगाये हुएकी भाँति किससे प्रेरित होकर पापका आचरण करता है?
arjuna uvāca | atha kena prayukto 'yaṃ pāpaṃ carati pūruṣaḥ | anicchann api vārṣṇeya balād iva niyojitaḥ ||
अर्जुन म्हणाला—हे वार्ष्णेय! मग हा पुरुष न इच्छिताही, जणू बलपूर्वक लावल्याप्रमाणे, कोणाच्या प्रेरणेने पाप आचरण करतो?
अजुन उवाच