Karma-Saṃnyāsa–Karma-Yoga Saṃvāda
Renunciation and the Discipline of Action
नैव तस्य कृतेनार्थों नाकृतेनेह कश्नन । न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रय:,क्योंकि उस महापुरुषका इस विश्वमें न तो कर्म करनेसे कोई प्रयोजन रहता है और न कर्मोके न करनेसे ही कोई प्रयोजन रहता है तथा सम्पूर्ण प्राणियोंमें भी इसका किंचिन्मात्र भी स्वार्थका सम्बन्ध नहीं रहता
naiva tasya kṛtenārtho nākṛteneha kaścana | na cāsya sarvabhūteṣu kaścid arthavyapāśrayaḥ ||
कारण त्या महापुरुषाला या जगात कर्म केल्यानेही काही प्रयोजन नसते आणि कर्म न केल्यानेही काही प्रयोजन नसते; तसेच सर्व प्राण्यांमध्येही त्याचा स्वार्थासाठी कोणावरही आधार नसतो।
अजुन उवाच