प्राग्ज्योतिषे वज्रदत्त-धनंजय-समागमः
Vajradatta Confronts Dhanaṃjaya at Prāgjyotiṣa
इस प्रकार श्रीमह्याभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वरमें अ्जुनिके द्वारा अश्वका अनुसरणविषयक तिह्तत्तववाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ७३ ॥। अपने-आप बछ। आर: 2 चतु:सप्ततितमो< ध्याय: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय वैशम्पायन उवाच त्रिगर्तैरभवद् युद्ध कुतवैरै: किरीटिन: । महारथसमज्ञातैहतानां पुत्रनप्तृभि:,वैशम्पायनजी कहते हैं--राजन! कुरुक्षेत्रके युद्धमें जो त्रिगर्त वीर मारे गये थे, उनके महारथी पुत्रों और पौत्रोंने किरीटधारी अर्जुनके साथ वैर बाँध लिया था। त्रिगर्तदेशमें जानेपर अर्जुनका उन त्रिगर्तोंक साथ घोर युद्ध हुआ था
vaiśampāyana uvāca | trigartair abhavad yuddhaṃ kṛtavairair kirīṭinaḥ | mahāratha-samājñātaiḥ hatānāṃ putra-naptṛbhiḥ ||
वैशंपायन म्हणाले—राजन्! कुरुक्षेत्रयुद्धात जे त्रिगर्त वीर मारले गेले, त्यांच्या महारथी पुत्र-पौत्रांनी किरीटधारी अर्जुनाशी वैर बांधले होते. अर्जुन त्रिगर्तदेशात पोहोचताच त्यांच्याशी घोर युद्ध झाले.
वैशम्पायन उवाच