Vāraṇāvata-praveśa and Jatugṛha-saṃdeha
Entry into Vāraṇāvata and Suspicion of the Lac-House
गान्धारी च महाभागा कुन्ती च जयतां वर । स्त्रियश्व राज्ञ: सर्वास्ता: सप्रेष्या: सपरिच्छदा:,विजयी वीरोंमें श्रेष्ठ जनमेजय! परम सौभाग्यशालिनी गान्धारी, कुन्ती तथा राजभवनकी सभी स्ट्रियाँ वस्त्राभूषणोंस सज-धजकर दास-दासियों और आवश्यक सामग्रियोंके साथ उस भवनमें आयीं तथा जैसे देवांगनाएँ मेरुपर्वतपर चढ़ती हैं, उसी प्रकार वे हर्षपूर्वक मंचोंपर चढ़ गयीं। ब्राह्मण, क्षत्रिय आदि चारों वर्णोके लोग कुमारोंका अस्त्र- कौशल देखनेकी इच्छासे तुरंत नगरसे निकलकर आ गये। क्षणभरमें वहाँ विशाल जनसमुदाय एकत्र हो गया
dhṛtarāṣṭra uvāca |
gāndhārī ca mahābhāgā kuntī ca jayatāṃ vara |
striyaś ca rājñaḥ sarvāstāḥ sapreṣyāḥ saparicchadāḥ ||
विजयी वीरांमध्ये श्रेष्ठ जनमेजया! परम सौभाग्यवती गांधारी, कुंती आणि राजभवनातील सर्व स्त्रिया दासी-परिचारिकांसह व आवश्यक सामग्री घेऊन, वस्त्राभूषणांनी सजून तेथे आल्या।
धृतराष्ट उवाच