पाण्डोः तपः-प्रसङ्गः, ऋण-धर्मः, अपत्य-प्राप्ति-चिन्ता
Pāṇḍu’s Asceticism, the Doctrine of Debts, and Deliberations on Progeny
स वर्थमानो बलवान् सर्वास्त्रिपूद्यतो 5भवत् | आ पृष्ठतापादादित्यमुपातिष्ठत वीर्यवान्,वह बलवान बालक बड़े होनेके साथ ही सब प्रकारकी अस्त्रविद्यामें निपुण हुआ। पराक्रमी कर्ण प्रातःकालसे लेकर जबतक सूर्य पृष्ठभागकी ओर न चले जाते, सूर्योपस्थान करता रहता था
तो बलवान बालक वाढत वाढत सर्व प्रकारच्या अस्त्रविद्येत निपुण झाला. पराक्रमी कर्ण पहाटेपासून सूर्य पृष्ठभागाकडे (पश्चिमेकडे) वळेपर्यंत सूर्योपासना करीत असे.
वैशम्पायन उवाच