काशिराजबलं चैव क्षयं नीत्वा जनार्दनः उवाच पौण्ड्रकं मूढम् आत्मचिह्नोपलक्षणम् //
एकविसावा श्लोक—येथे फक्त संख्या आहे; पाठ नसल्याने अर्थानुवाद होत नाही।