दमयन्त्याः कार्यनिश्चयः — Damayantī’s Crisis Plan and Vārṣṇeya’s Departure
हि आय न [के है आम सप्तपञ्चाशत्तमो<्ध्याय: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल- दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन बृहदश्व उवाच अथ काले शुभे प्राप्ते तिथौ पुण्ये क्षणे तथा । आजुहाव महीपालान् भीमो राजा स्वयंवरे,बृहदश्व मुनि कहते हैं--राजन्! तदनन्तर शुभ समय, उत्तम तिथि तथा पुण्यदायक अवसर आनेपर राजा भीमने समस्त भूपालोंको स्वयंवरके लिये बुलाया
Bṛhadaśva uvāca: atha kāle śubhe prāpte tithau puṇye kṣaṇe tathā | ājuhāva mahīpālān bhīmo rājā svayaṃvare ||
ബൃഹദശ്വൻ പറഞ്ഞു—അനന്തരം ശുഭകാലം വന്നപ്പോൾ, പുണ്യതിഥിയും മംഗളക്ഷണവും ലഭിച്ച വേളയിൽ, രാജാവ് ഭീമൻ സ്വയംവരത്തിനായി ഭൂമിയിലെ എല്ലാ രാജാക്കളെയും ക്ഷണിച്ചു।
बृहदश्व उवाच